Kashmir Mein Aatankwad by Major Saras Tripathi

कश्मीर का आतंकवाद और विद्रोह जो अस्सी के दशक में प्रारंभ हुआ और अभी तक चल रहा है मूलतः पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित किया गया है, ताकि ‘भारत को हजारों घावों से आहत कर लहूलुहान’ (जुल्फिकार अली भुट्टो के शब्दों में ‘टु ब्लीड इंडिया थ्रू थाउसैंड कट्स’) किया जा सके और भारत को दारुल-इसलाम में परिवर्तित किया जा सके। इस घृणित उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए पाकिस्तान ने कश्मीर के नौजवानों को प्रलोभन देकर आकर्षित किया, आतंकवादी गतिविधियों के लिए प्रशिक्षित किया और हथियार देकर वापस कश्मीर में सशस्त्र विद्रोह के लिए धकेल दिया, ताकि वे चुन-चुनकर हिंदुओं (कश्मीर पंडितों) की हत्या कर सकें और दारुल-इसलाम का स्वप्न साकार कर सकें। परंतु यह हत्याएँ हिंदुओं तक सीमित नहीं रह सकीं।
लेखक ने कश्मीर घाटी में 1992 से 1994 तक ‘सशस्त्र सेना विशेषाधिकार अधिनियम’ के अंतर्गत आतंकवाद विरोधी सैन्य अभियान में तथा 1997 से 1999 तक नियंत्रण रेखा पर रहकर देश की सेवा की। यह पुस्तक उन परिदृश्यों, घटनाओं और मानवीय प्रतिक्रियाओं का विवरण है, जो अत्यंत अच्छी या अत्यंत बुरी होने के कारण लेखक के मन-मस्तिष्क में रच-बस गई थीं। ये वे घटनाएँ हैं, जिन्होंने लेखक के हृदय को छुआ तथा चिरकाल तक अवस्थापित रहीं। प्रत्येक घटना, कश्मीर के हालात को, किसी विश्लेषणात्मक पुस्तक से अधिक प्रकट करती हैं।

Publication Language

Hindi

Publication Access Type

Freemium

Publication Author

MAJOR SARAS TRIPATHI

Publisher

Prabhat Prakashana

Publication Year

2017

Publication Type

eBooks

ISBN/ISSN

9789352663033'

Publication Category

Premium Books

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