Amarnath Yatra by Amit Kumar Singh

यात्रा जीवन का रोमांच है। यात्रा का बाहरी-सुख अंतस के आनंद को भी झंकृत करता है। इसलिए यात्रा करना जहाँ आनंदप्रद होता है, वहीं यह उस स्थान की सभ्यता-संस्कृति को भी जानने का अवसर देती है। तीर्थ स्थलों की यात्रा आनंद के साथ-साथ हमें भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत कर देती है।
ऐसी ही एक अत्यंत पवित्र अमरनाथ-यात्रा संपूर्ण दृष्टि से सत्यं शिवं सुंदरम् का जीवंत रूप है। अमरनाथ-यात्रा के दौरान, जब प्रकृति का अनुपम सौंदर्य, अनायास उद्घाटित होता है, तभी यह समझ आता है कि हिंदू-परंपरा में सौंदर्य को सत्य और शिव के समकक्ष क्यों स्थान दिया गया है! यों ही यात्रा में तीर्थयात्रियों की अप्रतिम श्रद्धा, सेना की चुस्ती और स्थानीय-कश्मीरियों के अकल्पनीय-सहयोग से एक शुभ और संगीतमय वातावरण निर्मित हो जाता है। यहाँ शुभ से मिलन है। अमरनाथ-यात्रा भारत की आत्मा का गहन अवलोकन भी है। भारत सत्य के प्रयोग की अनूठी भूमि रही है। यहाँ सत्य की गहरी प्यास देखी जा सकती है। अमरनाथ-यात्रा इसकी बानगी प्रस्तुत करती है।
अमरनाथ-यात्रा की इस वृत्तांत-गंगा में डुबकी लगाने के लिए आप सभी पाठकों का आमंत्रण है। बस आपको पूर्व धारणाओं, किस्सों और मान्यताओं का वस्त्र अनावतरित करना पड़ेगा। यह थोड़ा कठिन है, परंतु असंभव नहीं। तभी इस डुबकी में हमें आनंद की झलक मिल सकेगी। संपूर्ण अमरनाथ यात्रा का सरस एवं तथ्यपरक रोमांचक वर्णन।

51 Vigyan Prayog by Shyam Sunder Sharma

प्रयोग हमेशा बड़े ही नहीं होते और न ही हमेशा वे सुसज्जित प्रयोगशालाओं में, जिनमें सब प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध होती हैं, किए जाते हैं। अनेक प्रयोग घरों में भी आसानी से, उपलब्ध सामानों से, किए जा सकते हैं। हम इस पुस्तक में कुछ ऐसे प्रयोग बता रहे हैं, जिन्हें तुम अपने घरों में भी, आसानी से उपलब्ध चीजों की सहायता से, कर सकते हो।
प्रयोगों के बाद उनमें निहित सिद्धांतों को समझाने का भी प्रयत्न किया गया है। आशा है, तुम रुचि लेकर ये प्रयोग करोगे और उनसे कुछ सीखोगे। हो सकता है कि तुममें से कुछ बच्चों को इन प्रयोगों से वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा मिल जाय। यदि ऐसा हो जाए तो हम सबको बहुत खुशी होगी।

Antariksha Mein Jeevan by Kali Shankar

अंतरिक्ष में रहना आसान नहीं है। कपड़े धोना और खाना-पीना अंतरिक्ष की भारहीनता में बहुत जटिल प्रक्रियाएँ बन जाती हैं। छोटे-से-छोटा कार्य भी अंतरिक्ष में, जहाँ पर सभी चीजें भारहीन होकर तैर रही हों, चुनौतीपूर्ण बन जाता है। प्रस्तुत पुस्तक में, अंतरिक्ष में जीवन के विभिन्न पहलुओं-भोजन, शयन, स्पेस सूट, स्पेस वॉक, तैरना, व्यायाम इत्यादि को विस्तृत रूप में चित्रों के माध्यम से समझाया गया है। अंतरिक्ष में जीवन-शैली के ऊपर एक प्रश्नोत्तरी भी प्रस्तुत की गई है, जिसके उत्तर अंतरिक्ष में जा चुके अंतरिक्ष यात्रियों और अंतरिक्ष विशेषज्ञों द्वारा दिए गए हैं। विश्वास है, यह पुस्तक विद्यार्थियों, अंतरिक्ष विज्ञान में रूचि रखनेवाले पाठकों एवं सामान्य जन के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

Vidyarthiyon Ke Liye Time Management by Mamta Mahrotra

अपने मिनटों का ध्यान रखो, घंटे अपनी परवाह खुद कर लेंगे। हर काम को स्फूर्ति से निपटाएँ। टाल-मटोल न करें। अवसर को हाथ से न जाने दें। समय की कमी का रोना रोने की बजाय उसकी खेती करें, जो समय का ज्यादा दुरुपयोग करते हैं, वे ही समय की कमी की सबसे ज्यादा शिकायत करते हैं। यानी अपने 24 घंटे को किस तरह से 48 घंटे में बदल सकते हैं, वह करें। स्वेट मार्डेन का कहना है, ‘‘ईश्वर एक बार एक ही क्षण देता है और दूसरा क्षण देने के पूर्व उस क्षण को ले लेता है।’’ समय यानी टाइम का महत्त्व बताकर इसकी बखूबी मैनेजमेंट करना सिखानेवाली यह पुस्तक विद्यार्थियों को न केवल परीक्षाओं अपितु जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के मूलमंत्र बताती है।

Aur Ek Yudhishithir by Bimal Mitra

प्रस्तुत है, आज की मारा-मारी, बेईमानी, हेरा-फेरी और भ्रष्टाचार के युग
में ईमानदार, घूस न लेने-देनेवाले, कर्मठ एवं सहृदय युधिष्ठिर की कहानी, बँगला
के प्रख्यात साहित्यकार श्री बिमल मित्र
की जबानी।

Falon Aur Sabziyon Se Chikitsa by Dr. H.K. Bakhru

फलों एवं सब्जियों से चिकित्सा
विश्व की अधिकांश चिकित्सा पद्धतियों—आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, तिब्बती, एलोपैथी आदि—में अनेक प्रकार की वनस्पतियों यानी फलों-सब्जियों एवं उनके अवयवों आदि का उपयोग ही अधिक होता है। आयुर्वैदिक चिकित्सा में सबसे मुख्य बात यह होती है कि इसमें उपयुक्त दवाओं में रोग के मारक गुण कम और शोधक अधिक होते हैं। इनके उपचार से रोग दबता नहीं है, बल्कि हमेशा के लिए जड़ से समाप्त हो जाता है।
वैसे तो क्या गरीब, क्या अमीर—सभी लोग फलों एवं सब्जियों का उपयोग अपने सामर्थ्य के अनुसार करते ही हैं; लेकिन इनका उपयोग यदि चिकित्सा की दृष्टि से किया जाए तो अनेक छोटे-बड़े रोगों से छुटकारा मिल सकता है। फल एवं सब्जियाँ स्वास्थ्य के रक्षक हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में सर्वसुलभ फलों एवं सब्जियों से अनेक रोगों की चिकित्सा में इनका उपयोग बड़ी सीधी-सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है। उपयोगिता की दृष्टि से यह पुस्तक प्रत्येक गृहस्थ, आयुर्वैदिक चिकित्सक एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए पठनीय एवं संग्रहणीय है।

Lok Vyavahar by Surya Sinha

जीवन मै जिन छोटी-छोटी बातों को महत्त्वहीन समझकर हम नजरअंदाज करते रहते हैं, वही आगे चलकर हमारी सफलता- असफलता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं ।
प्रसिद्ध लेखक सूर्या सिन्हा का कहना है कि हमारी असफलता का मुख्य कारण यह है कि हम लोगों को अपना नहीं बना पाते और न ही किसी के बन पाते हैं । जीवन की भागमभाग में हम खुलकर किसी से अपनी भावनाएँ व्यक्‍त नहीं कर पाते अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाते, जिससे हमारे अपने जीवन में, घर में, मित्रों में, रिश्तेदारों में और समाज में पारस्परिक दूरियाँ बढ़ रही हैं ।
मानवीय व्यवहारों पर आधारित यह एक उत्कृष्‍ट पुस्तक है, जो मौन को तोड़ती है और समता, ममता एवं प्यार से हमें एक-दूसरे से जोड़ती है । आज के वातावरण में जीवन में सफलता पाने का एकमात्र उपाय है कि हम लोगों को अपना बनाना सीखें ।
प्रस्तुत पुस्तक ‘ लोगों को अपना कैसे बनाएँ ‘ आपसी दूरियों और अकेलेपन को मिटाकर नई भावना, नई सोच और सबको अपना बनाने के द्वार खोलने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी, जिससे हम जीवन में सुख- सफलता अवश्य प्राप्‍त कर सकेंगे ।

Aapka Swasthya Aapke Haath by Dinanath Jhunjhunwala

बीमारी केवल शारीरिक ही नहीं हुआ करती, अगर व्यक्ति मानसिक बीमारियों जैसे-काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि से ग्रस्त हैं तो भी वह बीमार ही माना जाएगा। अत: पूर्ण स्वस्थ व्यक्ति वह है, जो शारीरिक एवं मानसिक दृष्टि से स्वस्थ है।
बीमारियों का कारण हम स्वयं बनते हैं। शारीरिकबीमारियों केनिवारण केलिए ‘प्रात: भ्रमण’ तथा ‘योग’ को दिनचर्या में अपनाना जरूरी है। इससे बिना दवा खाए भी व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है।
प्रस्तुत पुस्तक में विद्वान् लेखक ने यह बताया है कि स्वस्थ रहने के लिए प्रात: भ्रमण कैसे करना चाहिए भोजन तथा आहार कैसा होना चाहिए तथा कब करना चाहिए दांपत्य जीवन को कैसे सफल बनाया जा सकता है, वृद्धावस्था की समस्याएँ एवं उनका समाधान, सुख क्या है और कहाँ?, जल ही जीवन है आदि।
स्वस्थ रहने के लिए सबसे अहम बात यह है कि हम उन चीजों के सेवन से परहेज करें, जिनकी हमें जरूरत नहीं है, जो हानिकारक हैं। पान, पान मसाला, खैनी, शराब, मांसाहार के बिना भी हम अधिक स्वस्थ बने रह सकते हैं, अत: इनका सेवन करकेबीमार क्यों पड़े?
यह हमेशा ध्यान रखें कि स्वस्थ रहना प्राकृतिक है, अस्वस्थ रहना अप्राकृतिक। आज हर कोई-क्या गरीब, क्या अमीर-अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित है। ऐसे में इस पुस्तक की उपयोगिता और बढ़ जाती है। आशा है, सुधी पाठक पुस्तक में दिए सुझावों को अपने जीवन में अपनाकर पूर्ण स्वस्थ तथा निरोग रह सकते हैं।

Shyam, Phir Ek Bar Tum Mil Jate! by Dinkar Joshi

दौड़कर उसने कृष्ण के पाँव से तीर खींचने के लिए हाथ बढ़ाया । कृष्ण उसकी व्यग्रता को निमिष- भर ताकते रहे, फिर निषेध में दाहिना हाथ उठाया ।
जरा ठिठक गया- ” क्यों, नाथ, क्यों?”
” रहने दो, भाई! माता गांधारी के वचन में व्यवधान बनने का व्यर्थ प्रयत्‍न मत करो!” बड़ी धीरता से वे बोले ।
” मैंने महापातक किया है! मुझे क्षमा करो, नाथ! मैंने.. .मैंने आपको जंगली प्राणी समझकर आप पर तीर चलाया । यह मैंने क्या किया, नाथ!” जरा भूमि पर लोटकर करुण क्रंदन करने लगा ।
” उठो वत्स!” करुणार्द्र स्वर में कृष्ण बोले, ” तुम्हारा नाम क्या है?”
” मेरा नाम ?. .जरा ! ”
” जरा !. .ठीक!” कृष्ण का मधुर हास्य छलका । तलवे से बहकर रक्‍तधारा भूमि पर काफी दूर चली गई थी । ” जरा, तुम्हारा नाम सार्थक है, तात ! ‘ जरा ‘ कभी किसीको नहीं छोड़ती ! अमरत्व के अभिशाप ने जिसे घेरा हो, उसे भी महाकाल जरा समेट ही लेता है न! जरा, तू तो निमित्त मात्र है, वत्स!”
– इसी उपन्यास से
कोई भी भारतीय भाषा ऐसी नहीं है जिसमें श्रीकृष्ण को केंद्र में रखकर काव्य, कहानी, उपन्यास. नाटक, संदर्भ-ग्रंथ आदि साहित्य का सर्जन न किया गया हो । ‘ श्याम, फिर एक बार तुम मिल जाते ‘ (मूल गुजराती में लिखा) उपन्यास इन सबसे अनूठा इसलिए है कि यह सिर्फ उपन्यास नहीं है-यह तो उपनिषद् है! यथार्थ कहा जाए तो यह उपनिषदीय उपन्यास है ।
तत्कालीन आर्यावर्त्त में श्रीकृष्ण एक विराट‍् व्यक्‍त‌ित्व था । जब यह व्यक्‍त‌ित्व अनंत में विलीन हो गया तो जो सन्नाटा छा गया, उस सन्नाटे के चीत्कार का यह आलेखन है जब श्रीकृष्ण सम्मुख थे तब बात और थी जब वे विलीन हो गए तब वसुदेव-देवकी से लेकर अर्जुन, द्रौपदी, अश्‍वत्थामा, अक्रूर उद्धव और राधा पर्यंत पात्रों की संभ्रमिद मनोदशा को एक अनूठी ऊँचाई के ऊपर ले जाता है यह उपन्यास ।

Tarpan by Rita Shukla

गौतम गुरुजी अम्मा को पहुँचाने गली के मोड़ तक आए थे। रिक्शे पर बैठाते हुए उन्होंने हठात् उनके पाँव छू लिये थे।
‘‘सौ बरस जियो, बहुत बड़े विद्वान् बनो, बेटा…!’’
उसने रास्ते में ही अम्मा को आड़े हाथों लेना चाहा था, ‘‘क्या अम्मा, तुम भी…आज गलती से भंगवाली बर्फी का प्रसाद तो नहीं पा गईं…? अपने गाँवघर का पोथापुरान बखानने की क्या जरूरत थी, वह भी उनके सामने….’’
थोड़ी देर की चुप्पी के बाद धीरे से बोल उठी थीं, ‘‘गौतम दूसरों जैसा नहीं है, बचिया, मेरा विश्वास है उस पर…’’
वह हैरान सी अम्मा का चेहरा देऌखती रह गई थी, ‘‘इसके पहले तो तुमने कभी उन्हें देऌखा भी नहीं अम्मा…फिर भी कैसे तुम…’’
—इसी संग्रह से

Saral Ramayana by Shanker Baam

राम और रामकथा हमारी भारतीय संस्कृति के प्राण हैं। इनका जितना ही अधिक प्रचार-प्रसार बाल वर्ग में हो, अच्छा है। राम के जीवन से संबंध रखनेवाली ऐसी पुस्तकें इनी-गिनी ही हैं, जो बालक-बालिकाओं की सरल बुद्धि में आसानी से आ जाएँ। इसलिए जो बालक गोस्वामीजी की मूल अवधी भाषा से अपरिचित हैं, किंतु राष्ट्रभाषा के प्रेमी हैं, वे भी इससे लाभ उठा सकते हैं। यह सरल रामायण सभी वर्ग के बाल एवं प्रौढ़ पाठकों को रुचिकर लगेगी, इसी विश्वास के साथ। —शंकर बाम

Safalata Aapki Mutthi Mein by Sanjay Chadha

मनुष्य जीवन प्रकृति द्वारा दिया हुआ एक अद‍्भुत वरदान है। यह हमारा विशेषाधिकार नहीं है, इसलिए हमें इस बात का अहसास होना चाहिए कि वस्तुओं का संग्रह ही जीवन नहीं है और न सिर्फ बहुत ज्यादा धन कमा लेना ही सफलता है। जीवन की सच्ची सफलता सच्चे अर्थों में मन की शांति और चिंतामुक्‍त वातावरण में ही छुपी हुई है।
जीवन के कुछ दूसरे मायने भी हैं। जीवन सदा ऐसे जीना चाहिए जैसे सागर में पानी का बहाव, जिसको सिर्फ चलते जाना है और सिर्फ आगे बढ़ना है। लेकिन भयमुक्‍त और चिंता-रहित, तभी हम उसे सफल जीवन कह सकते हैं। इस अहसास को बाँटने के लिए यह पुस्तक लिखी गई है, ताकि हम ध्यान दे सकें कि जीवन का अर्थ क्या है और सफलता का मार्ग क्या है!

Romanchak Vigyan Kathayen by Jayant Vishnu Narlikar

रोमांचक विज्ञान कथाएँ
आधुनिक युग विज्ञान का युग है। मनुष्य के भाँति-भाँति के कौतूहलों और जिज्ञासाओं को शमित करने में विज्ञान ही सक्षम रहा है। विज्ञान के बल पर ही मनुष्य चंद्रमा पर उतरा और मंगल ग्रह पर उतरने की तैयारी कर रहा है। उसने अणु-परमाणु के विखंडन व संघटन के परिणाम जान लिये हैं और अंतरिक्ष के ग्रहों-उपग्रहों से संबंध स्थापित कर रहा है। विज्ञान की इन्हीं चमत्कारक गतिविधियों ने विज्ञान लेखन की कल्पना को नई-नई संचेतनाएँ दीं, जिससे रोचक व रोमांचक विज्ञान कथाओं का सृजन हुआ।
सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक एवं विज्ञान लेखक श्री जयंत विष्णु नारलीकर द्वारा लिखित ये विज्ञान कथाएँ रहस्य, रोमांच एवं अद‍्भुत कल्पनाशीलता से भरी हैं तथा अपने पाठकों को भरपूर आनंद देती हैं।

Chanakya Tum Laut Aao by Shivdas Pandey

भारतीय ऐतिहासिक संस्कृति की पुरातनता तथा भारत की सांस्कृतिक ऐतिहासिकता की प्राचीनता पर पाश्चात्य विद्वान् साहित्यकारों, यथा—‘विलियम जोंस’ प्रभृति जानकारों ने अपनी धार्मिक वर्चस्वता का भारत की ऐतिहासिक प्राचीनता पर जिस रूप में हमला बोलने का अत्युक्तिप्रद प्रयास किया, भारतीय विद्वान् साहित्यकारों को कदापि सह्य न हुआ। विद्वान् साहित्यकार डॉ. शिवदास पांडेय के प्रस्तुत उपन्यास ‘चाणक्य, तुम लौट आओ’ में तथा इसके पूर्व प्रकाशित उपन्यासों—‘द्रोणाचार्य’, ‘गौतम गाथा’ के प्राक्कथनों में उसकी नितांत अध्ययनशीलता की सीरिज उरेही जा सकती है। इन प्राक्कथनों में पाश्चात्यों के हमलों के मुँहतोड़ व्यक्तअव्यक्त प्रत्युत्तर गौर करने योग्य हैं।
डॉ. शिवदास पांडेयजी की औपन्यासिक दक्षता पुरातन ऐतिहासिक इमारतों के टूटेफूटे रूप को अपने अद्वितीय कौशल से प्रशंस्य साहित्यिक शिल्पी के स्वरूप ढालने में है। इन्होंने अद्वितीय, अपूर्व रूप में अपने सत्कार्य स्वरूप की सफल सिद्धि की है।
लेखक ने अपनी सृजन शक्ति की कल्पनात्मक डोर से सघन कथात्मक धूमिलताओं के बीच गहरे गड़े जिस अद्वितीय कौशल से प्रकाश का आँगन उकेरा, संयुक्त सूत्रात्मक बंधन में बाँधा, इस अभिनव बौद्धिक विशेषता को अपनी सविशेष सोच से अशेषगौरव उन्हें स्वतः प्राप्त हो जाता है।
इतिहास जब साहित्यमुख से अपने को अभिव्यक्त करता है तो निजी अविरामता में ‘द्रोण’ और ‘चाणक्य’ सदृश सरस्वती ही अपना नया उद्भव प्राप्त करती हैं। निश्चय ही, डॉ. शिवदासजी ने अपने ‘चाणक्य, तुम लौट आओ’ उपन्यास के जरिए भारतीय पुरातन क्षितिज के अनेक गौरवशील ध्रुव तारों के जो अभिनव परिचय कराए हैं, वैश्विक धरातल पर मानवसमाज की वे नूतन संस्कारगत लब्धि कहे जा सकते हैं।
—डॉ. सियाराम शरण सिंह ‘सरोज’

Doctor Mein Kya Karuin by Dr. Binda Singh

तेज रफ्तार जिंदगी में लोगों को अपना वजूद बचाने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है। जीवन की महत्त्वाकांक्षाएँ उफान पर हैं। माता-पिता की बच्चों से और बच्चों की माता-पिता से उम्मीदें बढ़ती जा रही हैं। पारिवारिक रिश्तों में भावनात्मक सहयोग एवं प्यार की कमी आ गई है। पति-पत्‍नी के संबंधों में अहं आ गया है। सात जन्मों का रिश्ता सात दिनों का होने लगा है। तलाक की घटनाएँ बढ़ गई हैं। युवा वर्ग एवं किशोर दिग्भ्रमित हो रहे हैं। मानसिक तनाव एवं आत्महत्या की घटनाओं ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया है। भले ही हम इंटरनेट की दुनिया में जी रहे हैं, लेकिन व्यावहारिक दुनिया से कटते जा रहे हैं। नकारात्मक मनोभाव हमारे मन में घर करते जा रहे हैं। बच्चे, किशोर, युवा, बुजुर्ग सभी के व्यवहार में आक्रामकता आ गई है। धैर्य कम हो गया है। हर व्यक्‍त‌ि किसी-न-किसी तरह मानसिक रूप से परेशान है। प्रस्तुत पुस्तक में इन बातों को ध्यान में रखकर सरल भाषा में बच्चों, किशोरों, युवा एवं बुजुर्ग को जागरूक करने की कोशिश की गई है कि वे खुद को इतना मजबूत रखें कि छोटी-छोटी परेशानियाँ उन्हें विचलित न कर सकें।
मनोविकारों और मनोरोगों को दूर कर जीवन में सकारात्मक भाव जाग्रत् कर जीने का आनंद उठाने की राह दिखाती पठनीय पुस्तक।

Awadhi Lok Sahitya Mein Prakriti Pooja by Vidya Vindu Singh

लोक अपनी नैसर्गिक स्थितियों में स्वयं प्रकृति का पर्याय है। लोक दृष्टि का विकास प्रकृति के सहजात संस्कारों का परिणाम ही है। लोक और प्रकृति के अंर्तसंबंधों के संदर्भ में विकसित हमारे जीवन के अनेक सांस्कृतिक आयामों में प्रकृति और मनुष्य के बीच जो अभेद दृष्‍ट‌ि है, वह मानती है कि जैसे मनुष्य रक्षणीय है, वैसे ही प्रकृति रक्षणीय है।
प्रकृति और मानवीय सरोकारों से संबद्ध मूल्य चेतना हमारे लोक साहित्य में, लोक संस्कारों में और आचारों-व्यवहारों में निरंतर अभिव्यक्त होती रही है। लोक-विद् डॉ. विद्या विंदु सिंह ने प्रस्तुत कृति में इसी मूल्य दृ‌ष्‍ट‌ि का उन्मोचन किया है। लोक परंपरा में उपस्थित प्रकृति की जीवंत हिस्सेदारी जिन विश्‍वासों और जिन आस्थाओं में प्रकट होती है—उनका सम्यक् और सार्थक निर्वचन प्रस्तुत कृति में संभव हुआ है।
आज जब हम प्रकृति के साथ जुड़़े रागानुबंध को तोड़कर नितांत अकेले पड़ते जा रहे हैं और इस परिदृश्य से उत्पन्न अनेक खतरों को झेल रहे हैं—तब हमें प्रकृति के साथ होने का अहसास यह कृति दिलाती है। अपनी सहज संवेद्यता में यह कृति समकालीन जीवन की अनेक जड़ताओं को भंग करने में अपनी भूमिका का निर्वाह करेगी।
—डॉ. श्यामसुंदर दुबे
निदेशक, मुक्‍त‌िबोध सृजनपीठ
डॉ. हरिसिंह, गौर केंद्रीय विद्यालय सागर (म.प्र.)

America Ki Shreshtha Kahaniyan by Mozej Michael

‘‘ठीक है, जैसा तुम कहो; लेकिन मुझे नहीं लगता कि तुम्हें बीमारी के मामले में कोई ज्यादा तजुरबा है और तुम्हारी मदद करके मुझे खुशी ही होती! जब तुम्हारे पति की ऐसी हालत होती है तो अमूमन तुम क्या करती हो?’’
‘‘मैं…मैं उन्हें सोने देती हूँ।’’
‘‘बहुत ज्यादा सोना भी सेहत के लिए बहुत अच्छा नहीं होता। तुम उन्हें कोई दवा नहीं देतीं?’’
‘‘ह…-हाँ।’’
‘‘तुम दवा के लिए उन्हें जगाती नहीं?’’
‘‘हाँ।’’
‘‘अगली खुराक वह कब लेते हैं?’’
‘‘अभी दो घंटे तक नहीं।’’
वह महिला निराश हो गई—‘‘देखो, अगर तुम्हारी जगह मैं होती तो मैं और जल्दी-जल्दी दवा देती। अपने घरवालों के साथ मैं यही करती हूँ।’’
—इसी पुस्तक से

अमेरिका का वैभव, उसकी शक्ति, उसका सामर्थ्य समस्त विश्व को अपनी ओर आकर्षित कर लेता है। परंतु चकाचौंध भरे अमेरिकी जनजीवन को करीब से देखें तो वहाँ भी सामाजिक-आर्थिक विषमताएँ हैं, जो संवेदनशील मन को झकझोर देती हैं। प्रस्तुत है ऐसी ही मर्मस्पर्शी कहानियों का संकलन।

Smritiyan by Garima Sanjay

इलाहाबाद विश्‍वविद्यालय से प्राचीन इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएट, पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा सहित प्रसिद्ध फिल्मकार कृष्णा शाह की फिल्म निर्माण की कार्यशाला में दक्षता प्राप्‍त। अब तक अनेक सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए कार्य, जैसे फिल्म्स डिवीजन, एन.एफ.डी.सी., दूरदर्शन, गृह मंत्रालय, यू.एन.डी.पी., यू.एन.ऐड्स, डिस्कवरी चैनल, उपभोक्‍ता एवं खाद्य मंत्रालय, इग्नू, स्वास्थ्य एवं परिवार मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग आदि। बी.बी.सी., ट्रांसटेल, डिस्कवरी चैनल आदि के लिए विविध डॉक्यूमेंटरी फिल्मों के हिंदी अनुवाद एवं डबिंग के कार्य। यूनिसेफ के लिए मिडिटेक के टेलीविजन सीरियल ‘क्योंकि जीना इसी का नाम है’ के अनुवाद एवं सब-टाइटल का कार्यभार भी सँभाला। अनेक रेडियो प्रोग्राम का लेखन जिनमें शामिल हैं—उपभोक्‍ता एवं खाद्य मंत्रालय की रेडियो श्रृंखला ‘जागो ग्राहक जागो’, आकाशवाणी एवं विज्ञान प्रसार के लिए विविध रेडियो सीरीज। विविध प्रकाशकों एवं संस्थाओं के लिए लेखन एवं अनुवाद कार्य।
संप्रति नई दिल्ली में लेखिका, पटकथा लेखिका, अनुवादिका और वृत्तचित्र निमाता/निर्देशिका।

Har-Har Gange by Shyamla Kant Verma

हर-हर गंगे

यह कलियुग है। मानवीय मूल्यों का ह्रास हो रहा है और दानवीय लीला का विकास। दुर्गुणों का बोलबाला है और सद‍्गुणों का लोप। चोरी, डकैती, हत्या आदि से मनुष्य संत्रस्त है। अनेक सामाजिक कुरीतियों—बाल-विवाह, विधवा-समस्या, दहेज प्रथा, भ्रूण-हत्या, बड़ा परिवार आदि ने मानव-मूल्यों को नष्‍ट कर रखा है। नैतिकता से कोई संबंध शेष नहीं रह गया है। समलैंगिक विवाह के पक्ष में भी लोग खड़े हो रहे हैं। प्रस्तुत सामाजिक उपन्यास ‘हर हर गंगे’ उपर्युक्‍त समस्याओं पर विमर्श प्रस्तुत करने के साथ ही निष्कर्ष भी उपस्थित करता है।
पात्रों के बीच सामाजिक समस्याओं पर विचार-विनिमय का ताना-बाना उपन्यास के कथ्य को बुनने में सहायक रहा है। पौराणिक कहानियों ने जरी के रूप में इस बनावट में चमक उत्पन्न की है। इस उपन्यास में हर व्यक्‍ति के जीवन की कहानी कही गई है। इसके सभी पात्र काल्पनिक हैं और सामाजिक औपचारिकताओं से बँधे हुए हैं। पौराणिक कहानियों का बोध कराने और विविध सामाजिक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करने में यह कृति सहायक सिद्ध होगी। अत्यंत रोचक, मनोरंजक और प्रेरणाप्रद उपन्यास।

Rozgaar by Vijay Shankar Pandey

सृष्टि के निर्माण में देवी-देवताओं से लेकर जल, थल, वायु, अग्नि, सूर्य, चंद्रमा, धरती, आकाश, जीव-जंतु, पहाड़, जंगल, नदी और मानव; इन सभी के पीछे कहानी है। कहानी का रूप सामाजिक, धार्मिक, ऐतिहासिक, भौगोलिक सभी में विद्यमान है। गाँव से लेकर नगर तक, जंगल से लेकर वादियों-घाटियों तक सबका उद्भव कहानी से ही संबंधित है। वही कहानीकार सफल कहानीकार होता है, जिसकी दृष्टि पैनी होती है। जो दृष्टि से देखता है, बुद्धि से समझता है तथा उस पर अमल करके उसका स्वरूप गढ़ता है; वह कहानी बन जाती है। कहानी में भी संवेदनाओं व परिस्थितियों का समावेश रहता है। कहानीकार का हृदय बड़ा भावुक और कोमल होता है। वह घटनाओं को भाषा का कलेवर देते हुए आकर्षक बना देता है, जिससे कहानी में सौंदर्य के साथ-साथ सुख-दु:ख भी चित्रित हो जाता है।
लेखक ने सरकारी विभाग में काम करते हुए सुख-दु:ख तथा समाज की विद्रूपताओं को नजदीक से देखा है। प्रस्तुत संग्रह की कहानियाँ कहीं पर हँसाती हैं, कहीं पर रुलाती हैं तो कहीं जीवन की गहराइयों को बेबाक उजागर करती हैं। बार-बार पढ़ने की उत्कंठा पैदा करने वाली मर्मस्पर्शी कहानियों का संग्रह।

Patna Mein 1857 Ki Bagawat by William Taylor

विलियम टेलर ने सन् 1857 में पटना विद्रोह को दबाने में अहम भूमिका निभाई थी, किंतु उसकी अनेक गतिविधियाँ ऊपर के पदाधिकारियों को पसंद नहीं आईं। अति उत्साह में उसके द्वारा उठाए गए कदमों की काफी आलोचना हुई। बिना पुख्ता सबूत के लोगों को फाँसी देना, धोखे से वहाबी पंथ के तीनों मौलवियों को गिरफ्तार करना, उद्योग विद्यालय खोलने के लिए जमींदारों से जबरदस्ती चंदा वसूल करना, पटना के प्रतिष्‍ठित बैंकर लुत्फ अली खाँ के साथ बदसलूकी से पेश आना, मेजर आयर को आरा की तरफ कूच करने से मना करना, बगावत की आशंका से सारे यूरोपीयनों को पटना बुला लेना इत्यादि अनेक कदम टेलर ने उठाए, जिससे ऊपर के पदाधिकारी, खासकर लेफ्टिनेंट गवर्नर हैलिडे बहुत नाराज हुए। परिणामस्वरूप 5 अगस्त, 1857 को विलियम टेलर को पदमुक्‍त कर दिया गया।
प्रस्तुत पुस्तक ‘पटना में 1857 की बगावत’ विलियम टेलर द्वारा अपने आपको दोषमुक्‍त साबित करने के लिए लिखी गई थी। इसमें उसने बताया है कि कितनी विषम परिस्थितियों में अपनी जान जोखिम में डालकर उसने अंग्रेज कौम का भला किया और एक सच्चे अंग्रेज का फर्ज निभाया।
पटना में स्वतंत्रता के प्रथम आंदोलन का जीवंत एवं प्रामाणिक इतिहास।

Jeet Ka Jadu by Ratneshwar K. Singh

जीत का जादू

जीत एक सुखद और आनंददायक एहसास है। जीवन की सार्थकता जीतने में ही है। सृष्‍टि का वैज्ञानिक स्वरूप जीत के फॉर्मूले पर आधारित है। इसलिए जीत एक सहज, सत्य और स्वाभाविक प्रक्रिया है।
जीत के लिए न तो किसी आपाधापी की आवश्यकता है और न ही किसी झूठ के सहारे की। हमारा जन्म ही जीत की शुरुआत है। हमारा जन्म जीतने के लिए ही हुआ है। कोई भी आदमी कभी हारता नहीं है, बस जीत का प्रतिशत कम या ज्यादा होता है।
जीत का लक्ष्य सच्चे आनंद को पाना है। हमारे द्वारा तय किया गया जीवन-लक्ष्य हमें सच्चे आनंद की ओर ले जाता है। इसलिए किसी मृग-मरीचिका में फँसे बगैर हमें सहज-सत्य के मार्ग पर चलते हुए अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। हमारा चल पड़ना ही जीत का उद‍्घोष है। कुछ करें या न करें, पर अपने लक्ष्य से यदि हम प्रेम कर लें तो जीत जाएँगे। जीवन की इस छोटी अवधि में हम सिर्फ प्रेम करें तो भी कम ही है, फिर घृणा के लिए समय कहाँ है? हम अपने कृत्यों के फल से कभी वंचित नहीं रह सकते। हमारे हर कर्म का फल निश्‍च‌ित है।
जीत यानी जीवन की सफलता के गुरुमंत्र बताती अत्यंत प्रेरणाप्रद पठनीय कृति।

Rocketon Ka Rochak Sansar by Kali Shankar

रॉकेटों का रोचक संसार

रॉकेट के विकास ने अंतरिक्ष अन्वेषण कार्य के लिए महान् संभावनाओं का रास्ता खोल दिया है। प्रायोगिक रूप में लाने के पहले रॉकेटों का प्रयोग अंतरिक्ष परिवहन के रूप में वैज्ञानिक दंत-कथाओं में भी काफी किया जा चुका है। प्रारंभ में रॉकेटों का उपयोग युद्धों में अस्‍‍त्रों व मिसाइलों के रूप में हुआ और समारोहों एवं खुशी के मौकों पर फायरवर्क के रूप में हुआ। लेकिन बाद में मानव ने अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए इसे अत्यधिक उपयोगी पाया। यदि रॉकेट का विकास न होता तो यूरी गागरिन की ऐतिहासिक अंतरिक्ष यात्रा संभव न होती और नील आर्मस्ट्रांग चाँद पर पदार्पण न कर पाते।
रॉकेटों के इस व्यापक रोचक संसार के बारे में जानने की जिज्ञासा आमजन में रहती है। इसकी जानकारी सरल-सुबोध भाषा में देने का प्रयास किया है प्रसिद्ध विज्ञान लेखक श्री काली शंकर ने, जिनकी अंतरिक्ष विज्ञान पर अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इस पुस्तक के माध्यम से पाठक रॉकेटों के साथ-साथ अंतरिक्ष के रोमांचक व रहस्यपूर्ण तथ्यों से परिचित हो पाएँगे और इस विषय में अपना भरपूर ज्ञानवर्धन करेंगे।

Hindi Cinema Ke 150 Sitare by  vinod Viplav

हिंदी सिनेमा के 150 सितारे

हमारे देश में क्रिकेट की तरह सिनेमा भी एक धर्म है और सिनेमा के सितारे उनके चाहनेवालों के लिए भगवान् हैं। ये सितारे सिनेमा के आविर्भाव के समय से ही हमारे दिलो-दिमाग पर राज करते आए हैं। लोग इनके जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में जानना चाहते हैं। यह पुस्तक सामाजिक सोच को प्रभावित करनेवाले सबसे सशक्‍त माध्यम सिनेमा की हस्तियों के बारे में प्रामाणिक जानकारियाँ देने के उद‍्देश्‍य से लिखी गई है।
इस पुस्तक में भारतीय सिनेमा के आरंभ से लेकर अब तक की प्रमुख हस्तियों के बारे में विस्तृत जानकारियाँ दी गई हैं। इसमें न केवल परदे पर दिखनेवाली हस्तियों के बारे में, बल्कि परदे के पीछे काम करके भारतीय सिनेमा को नई ऊँचाई देनेवाली हस्तियों को भी शामिल किया गया है। यह पुस्तक सिनेमा के आरंभ से लेकर अब तक की विभिन्न विधाओं की हस्तियों के बारे में जानकारियाँ देने के अलावा सिनेमा के आठ दशक से अधिक समय की विकास-यात्रा को भी समझने में मददगार साबित होगी।
प्रस्तुत पुस्तक न केवल सिनेमा-प्रेमियों को बल्कि आम पाठकों को भी पसंद आएगी।

Swami Dayanand Saraswati by Madhur Athaiya , Meenu Sinhal

आधुनिक भारत के महान् चिंतक, समाज-सुधारक व देशभक्‍त दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी, 1824 को टंकारा में जिला राजकोट, गुजरात में हुआ था। उनके पिता का नाम करशनजी लालजी तिवारी और माँ का नाम यशोदाबाई था। उनके पिता एक कर-कलेक्टर होने के साथ एक अमीर, समृद्ध और प्रभावशाली व्यक्‍ति थे। दयानंद सरस्वती का असली नाम मूलशंकर था और उनका प्रारंभिक जीवन बहुत आराम से बीता।
महर्षि दयानंद के हृदय में आदर्शवाद की उच्च भावना, यथार्थवादी मार्ग अपनाने की सहज प्रवृत्ति, मातृभूमि की नियति को नई दिशा देने का अदम्य उत्साह, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक व राजनैतिक दृष्‍टि से युगानुकूल चिंतन करने की तीव्र इच्छा तथा आर्यावर्तीय (भारतीय) जनता में गौरवमय अतीत के प्रति निष्‍ठा जगाने की भावना थी। उन्होंने किसी के विरोध तथा निंदा करने की परवाह किए बिना आर्यावर्त (भारत) के हिंदू समाज का कायाकल्प करना अपना ध्येय लिया था।
महर्षि दयानंद ने चैत्र शुक्ल प्रतिपदा संवत् 1932 को गिरगाँव बंबई में आर्यसमाज की स्थापना की। अपने महाग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में स्वामीजी ने सभी मतों में व्याप्‍त बुराइयों का खंडन किया है। स्वामी दयानंद के प्रमुख अनुयायियों में लाला हंसराज ने 1886 में लाहौर में ‘दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज’ की स्थापना की तथा स्वामी श्रद्धानंद हरिद्वार के निकट काँगड़ी में गुरुकुल की स्थापना की।

Swami Vivekanand Ke Jeevan Ki Kahaniyan by Mukesh Nadan

स्वामी विवेकानंद की कहानियाँ

भारत की पावन भूमि पर अनेक संत-महात्मा और ऋषि-मुनियों ने जन्म लिया। उनके द्वारा दिए गए सत्य, प्रेम, त्याग और मानवता के संदेशों से संपूर्ण विश्‍व ने प्रेरणा ली है। ऐसे ही एक तपस्वी, भारत के गौरव और महान् विभूति ने 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता में जन्म लिया, जिसका नाम था—स्वामी विवेकानंद।
नरेंद्र अर्थात् स्वामी विवेकानंद ने हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक पूरे देश का भ्रमण किया। अनेक स्थानों पर उन्होंने अपने व्याख्यानों से युवाओं को प्रभावित ही नहीं किया अपितु उन्हें एक नई दिशा दी। यहाँ तक कि उन्होंने राजा-महाराजा और नवाबों को उपदेश दिए। 11 सितंबर, 1893 को शिकागो में विश्‍व धर्म सम्मेलन हुआ। इसमें उनके द्वारा दिए गए भाषण ने पूरे विश्‍व में तहलका मचा दिया और हिंदू आध्यात्मिकता का परचम पूरे विश्‍व में लहरा दिया। इसके पश्‍चात् स्वामीजी ने अनेक देशों का भ्रमण किया तथा उपदेश दिए।
स्वामी विवेकानंद के जीवन की अनेक घटनाओं का वर्णन उनके जीवन पर आधारित विभिन्न पुस्तकों में मिलता है, जिन्हें हमने कहानियों के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। विश्‍वास है, स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित ये प्रेरक कहानियाँ अवश्य ही पाठकों के जीवन को एक नई दिशा प्रदान करेंगी।

Leo Tolstoy by Ramesh Ranjan

रूस के महान् लेखक लियो टाल्सटॉय 19वीं सदी के एक सम्मानित लेखक थे। युवावस्‍था में कुछ समय उन्होंने रूसी सेना में नौकरी की और इसी दौरान क्रीमियन युद्ध (1855) में भाग लिया। अगले वर्ष ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी और लेखन आरंभ कर दिया, जिसकी नींव उनके बचपन में ही पड़ चुकी थी। उनके उपन्यास ‘वॉर ऐंड पीस’ (1865-69) तथा ‘एना कैरनीना’ (1875-77) विश्‍व साहित्य की महान् रचनाओं में शामिल हैं।
आर्थ‌िक दृष्‍टि से अति संपन्न और सम्मानित होने के बावजूद वे आंतरिक शांति के लिए तरसते रहे। आखिरकार सन् 1890 में घर-बार और धन-संपत्ति त्यागकर वे गरीबों की सेवा करने लगे और 20 नवंबर, 1910 को कंगाली की हालत में गुमनाम वृद्ध के रूप में मृत्यु को प्राप्‍त हुए।
मानव मन को छूनेवाली सामाजिक समदर्शिता और पारस्परिकता का बोध करानेवाली अगणित पठनीय रचनाओं के महान् लेखक की प्रेरणादायी जीवनी।

Shaheed-E-Vatan Ashfaq Ullah Khan by M.I. Rajasvi

अशफाक उल्ला खाँ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रांतिकारी थे। राम प्रसाद बिस्मिल की भाँति अशफाक उल्ला खाँ भी उर्दू भाषा के बेहतरीन शायर थे। उनका उर्दू तखल्लुस ‘हसरत’ था। उर्दू के अतिरिक्‍त वे हिंदी व अंग्रेजी में लेख एवं कविताएँ लिखा करते थे। उनका पूरा नाम अशफाक उल्ला खाँ वारसी हसरत था।
अशफाक का जन्म उत्तर प्रदेश के शहीदगढ़ शाहजहाँपुर में रेलवे स्टेशन के पास कदनखैल जलालनगर मुहल्ले में 22 अक्‍तूबर, 1900 को हुआ था। उनके वालिद का नाम मोहम्मद शफीक उल्ला खाँ था। उनकी वालिदा मजहूरुन्निशा बेगम खूबसूरत खबातीनों में गिनी जाती थीं। अशफाक अपने भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। सब उन्हें प्यार से ‘अच्छू’ कहते थे।
बंगाल में शचींद्रनाथ सान्याल व योगेश चंद्र चटर्जी जैसे दो प्रमुख व्यक्‍तियों के गिरफ्तार हो जाने पर हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का पूरा दोरोमदार बिस्मिल के कंधों पर आ गया। इसमें शाहजहाँपुर से प्रेमकृष्ण खन्ना, ठाकुर रोशन सिंह के अतिरिक्‍त अशफाक उल्ला खाँ का योगदान सराहनीय रहा। काकोरी ट्रेन डकैती में उनकी उल्लेखनीय भूमिका रही।
26 सितंबर, 1925 की रात जब पूरे देश में एक साथ गिरफ्तारियाँ हुईं अशफाक पुलिस की आँखों में धूल झोंककर फरार हो गए। उन्हें पुलिस बहुत बाद में गिरफ्तार कर पाई थी। 13 जुलाई, 1927 को उन्हें फाँसी की सजा सुनाई गई।

Krantinayak Bipin Chandra Pal by M.I. Rajasvi

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की नींव तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभानेवाली लाल-बाल-पाल की तिकड़ी में से एक बिपिनचंद्र पाल राष्‍ट्रवादी नेता होने के साथ-साथ शिक्षक, पत्रकार, लेखक और एक प्रखर वक्‍ता भी थे। उन्हें भारत में क्रांतिकारी विचारों का जनक माना जाता है। लाल-बाल-पाल की इस तिकड़ी ने सन् 1905 में बंगाल-विभाजन के विरोध में ब्रिटिश शासन के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन किया।
उन्होंने महसूस किया कि विदेशी उत्पादों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था खस्ताहाल हो रही है और यहाँ तक कि लोगों का काम-काज भी छिन रहा है, अतः अपने आंदोलन में उन्होंने इस विचार को भी सामने रखा। राष्‍ट्रीय आंदोलन के दौरान ‘गरम धड़े’ के अभ्युदय को महत्त्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे आंदोलन को एक नई दिशा मिली और भारतीय जनमानस में जागरूकता बढ़ी।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान महर्षि अरविंद के खिलाफ गवाही देने से इनकार करने पर बिपिनचंद्र पाल को छह महीने की सजा हुई। जीवन भर राष्‍ट्र-हित के लिए काम करनेवाले बिपिनचंद्र पाल 20 मई, 1932 को भारत माँ के चरणों में अपना सर्वस्व त्यागकर परलोक सिधार गए।

Baba Shekh Farid Ratnawali by Jasvinder Kaur Bindra

बाबा शेख फरीद रचनावली

भारत में सूफी काव्य-परंपरा काफी समृद्ध रही है। मुसलमान कवियों ने पंजाब में सूफी काव्य की बुनियाद रखी, जिनमें शेख फरीद सर्वोपरि हैं। उनका पूरा नाम फरीदुद‍्दीन ‍मसऊद शक्करगंज है। दरअसल, शेख फरीद से ही भारतीय सूफी काव्य का आरंभ माना जाता है। फरीद का जन्म हिजरी 569 अर्थात् 1173 ईसवी में हुआ। उस दिन मोहर्रम की पहली तारीख थी। फरीद के पिता उनकी बाल्यावस्था में ही गुजर गए थे। उनकी माता ने ही उनके पालन-पोषण व शिक्षा की जिम्मेदारी पूरे फकीरी तथा दरवेशी ढंग से निभाई। उन्होंने बचपन से ही बालक फरीद को खुदापरस्ती की शिक्षा दी। पवित्र तथा संत स्वभाववाली माता की देखरेख में फरीद बचपन से ही प्रभु-भक्‍त हो गए। किशोर अवस्था में फरीद अपने सूफियाना स्वभाव के कारण कोतवाल (खोतवाल) में प्रसिद्ध हो गए थे।
प्रस्तुत पुस्तक में उनके व्यक्‍तित्व एवं उनके द्वारा विविध भाषाओं में रचित साहित्य से परिचित कराया गया है। फरीद-वाणी के दोहों तथा महला को व्याख्या सहित दिया गया है। संत साहित्य में विशिष्‍ट स्थान रखनेवाले बाबा शेख फरीद की रचनाओं का अत्यंत महत्त्वपूर्ण व संग्रहणीय संकलन।