Sushasan Ke Aaine Mein Naya Bihar by Pankaj Kumar Jha
सुशासन के आईने में नया बिहार—पंकज झा
बिहार लोकतंत्र का तीर्थ कहा जाता है। बिहार के लोकतंत्र में जाति है, रंगदारी है, छल-कपट है और बूथ की लूट भी! लोकतांत्रिक राजनीति के छह दशक बाद भी बिहार में बेहद गरीबी है, बदहाली है, सार्वजनिक जीवन की न्यूनतम सुविधाओं का घोर अभाव है।
यह पुस्तक हमारी भेंट बिहार में लोकतांत्रिक राजनीति के उस चेहरे से करवाती है, जो भारत में ही नहीं, पूरी दुनिया में लोकतांत्रिक राजनीति का सबसे पेचीदा सवाल है। बिहार में सुशासन तभी कारगर व प्रभावी होगा, जब भूमि सुधार, समान शिक्षा विधेयक, किसान आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाएगा।
एक सुखद पहलू है कि आज बिहार में तथा बिहार से बाहर रहने वाले प्रत्येक बिहारी के मन में साहस और गर्व की अनुभूति है। लगभग 85-90 प्रतिशत लोगों ने यह माना है कि नीतीश कुमार के शासनकाल में सड़कें बनी हैं, कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधरीहै।
पुस्तक में शामिल आम लोगों की चिट्ठियाँ बिहार में सुशासन का प्रमाण हैं। समाज के अलग-अलग तबकों, खासतौर से बहिष्कृत समाज की आवाज को शामिल करना इस पुस्तक की एक विशिष्ट उपलब्धि है।
| Publication Language |
Hindi |
|---|---|
| Publication Access Type |
Freemium |
| Publication Author |
PANKAJ KUMAR JHA |
| Publisher |
Prabhat Prakashana |
| Publication Year |
2010 |
| Publication Type |
eBooks |
| ISBN/ISSN |
9789380186283' |
| Publication Category |
Premium Books |
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