Swami Vivekanand : Prasiddh Darshnik, Anjaan Kavi by Radhika Nagrath
स्वामी विवेकानंद के बारे में उपलब्ध अद्भुत कार्यों के बीच इस पुस्तक का विशेष महत्त्व है, क्योंकि इसमें उन विषयों और पहलुओं को दरशाया गया है, जिन पर समीक्षकों ने कभी ध्यान नहीं दिया।
लेखिका ने विवेकानंद के महामनस्क व्यक्तित्व के छिपे हुए कई पहलुओं—वक्ता, चिंतक, संरक्षणवादी और देशभक्त संन्यासी को उजागर किया है। उनके काव्यकौशल ने उनके दार्शनिक व्यक्तित्व को पार्श्व में नहीं ढकेला, बल्कि दोनों के बीच संतुलन का रास्ता बनाया। विवेकानंद की काव्यविशेषताओं के विश्लेषण का लेखिका का प्रयास विश्व में सर्वप्रथम है।
लेखिका जिस सबसे आश्चर्यजनक बिंदु पर पहुँची हैं, वह है पी.बी. शेली का कवि के रूप में विवेकानंद पर प्रभाव, जिसके बल पर वे रोमांटिक वास्तविकता को शास्त्रीय दृष्टि में बदलने में सफल हुए। इस पुस्तक की अद्वितीयता यह है कि इसमें प्राकृतिक वस्तुओं के बजाय, विवेकानंद के अतिसंवेदनशील स्वरूप अथवा तत्त्व को उनकी कविताओं के विषय के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जहाँ कवि विवेकानंद के बारे में सुनकर अधिकतर लोगों को आश्चर्य होता है, वहीं लेखिका ने विवेकानंद के जगत् की दार्शनिक कमियों को अपनी कविताओं में दार्शनिक समाधानों के प्रयास को इस तरह से खोजा है कि भौतिक रुझान से आध्यात्मिक रुझान अधिक सशक्त होकर उभरा है।
| Publication Language |
Hindi |
|---|---|
| Publication Access Type |
Freemium |
| Publication Author |
Radhika Nagrath |
| Publisher |
Prabhat Prakashana |
| Publication Year |
2016 |
| Publication Type |
eBooks |
| ISBN/ISSN |
9789351862239' |
| Publication Category |
Premium Books |
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