Yagya by Dattatraya Kher / Sailja Raje

उपन्यास-लेखन में एक एकदम नई विधा को लेकर ‘ यज्ञ ‘ लिखा गया है । यह उपन्यासपरक जीवनी न होकर जीवनपरक उपन्यास है । किसी महानायक के महानिर्वाण के तुरंत बाद लिखा गया यह शायद पहला ही उपन्यास है ।
मराठी में यह नई विधा पहली बार लाने का श्रेय ‘ यज्ञ ‘ उपन्यास को जाता है । वास्तव में सावरकरजी सरीखे महानायक के जीवन पर तो एक सशक्‍त महाकाव्य रचा जा सकता है । इस उपन्यास में महाकाव्य के सभी रस, साहित्य के सभी प्रकार, सावरकरजी के व्याख्यान, उनकी काव्य-रचनाएँ नाटकीय प्रसंग आदि का ताना-बाना ऐसी कुशलता से बुना गया है कि न तो उसकी रोचकता कहीं कम हुई है, न ही कथ्य के साथ कोई अन्याय ।
महानायक के प्रति असीम भक्‍त‌िभाव रखते हुए भी उसके जीवन की वास्तविकता के साथ पूरी प्रामाणिकता लेखकों ने रखी है । किसी महानायक के जीवन को ऐसी ललित शैली में एक नई विधा में बाँधने का ‘ यज्ञ ‘ अपने में पहला उदाहरण है । उपन्यास जहाँ विधा में अभिनवता लिये है, वहीं वह रसप्रधान एवं रोमांचक भी है । कल्पना से सत्य अधिक सुंदर एवं अद‍्भुत होता है, इस कथन को उपन्यास अपने पन्ने-पन्ने में चरितार्थ करता है ।
कथ्य और उसकी रचना, दोनों दृष्‍ट‌ियों से, ‘ यज्ञ ‘ अभूतपूर्व रचना है । मराठी सारस्वत के लिए तो यह एक ललाम है ही, हिंदी के माध्यम से भारत भारती के भंडार को भी समृद्ध करने की क्षमता इसमें है ।

Publication Language

Hindi

Publication Access Type

Freemium

Publication Author

DATTATRAYA KHER / SAILJA RAJE

Publisher

Prabhat Prakashana

Publication Year

2007

Publication Type

eBooks

ISBN/ISSN

817315211X'

Publication Category

Premium Books

Kindly Register and Login to Shri Guru Nanak Dev Digital Library. Only Registered Users can Access the Content of Shri Guru Nanak Dev Digital Library.

SKU: 817315211X.pdf Categories: , Tags: ,
Reviews (0)

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “Yagya by Dattatraya Kher / Sailja Raje”