Bindas Bandar Aur Batuni Baraat by Indu Ranchan

बिंदास बंदर और बातूनी बारात
बचपन से ही हम—मैं, मेरी बड़ी बहन और छोटा भाई—अपने नाना से, यानी अपने बाईजी से उनकी अपनी शैली में और विशेष भावुकता से बताई अकबर-बीरबल की प्रचलित कहानियों को बहुत उत्सुकता से सुनते थे। इनके अलावा उनके हुक्के की गुड़गुड़ाहट भरे कशों के साथ कई तात्कालिक मन-गढ़ी कथाओं में हम हर शाम लालसा और कशिश से लीन हो जाते। मुझे लगता है कि कहानियों की रचना में मेरी रुचि मेरे नाना की देन है।
ग्यारह साल की उमर से जब मैंने अपनी बहन और भाई को बिना पूर्व कल्पना के धारावाही ढंग से खुद-ब-खुद बहती जाती कहानियाँ बतानी शुरू कीं, तब वे हर रोज़ कहानी की अगली कड़ी का बेकली से इंतज़ार करते—ऐसा चसका लग गया था हम तीनों को! मेरी स्वाभाविक ही प्रमुख वृत्ति हँसी और दिल्लगी में थी।
अभी हाल ही में बच्चों की माँग पर मुझे खड़े पैर कहानी बुनते पा, मेरी बेटी रन्नए ने मुझे बच्चों के लिए हिंदी में कहानियाँ लिखने का सुझाव दिया। इसीलिए उसकी प्रेरणा से उपजी ‘बिंदास बंदर और बातूनी बारात’ की झाँकी साक्षात् आपके सामने है।

Publication LanguageHindi
Publication Access TypeFreemium
Publication AuthorINDU RANCHAN
PublisherPrabhat Prakashana
Publication Year2012
Publication TypeeBooks
ISBN/ISSN9788173158230′
Publication CategoryPremium Books

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